IAS अशोक खेमका का 28 साल में 53वां ट्रांसफर, बोले- ईमानदारी का इनाम जलालत

हरियाणा में कार्यरत आईएएस अशोक खेमका का उनके 28 साल के करियर में 53वीं बार तबादला कर दिया गया है. इसको लेकर बुधवार को उन्होंने ट्वीट किया- कल संविधान दिवस मनाया गया. आज सर्वोच्च न्यायालय के आदेशऔर नियमों को एक बार फिर तोड़ा गया. ईमानदारी का इनाम जलालत. गौरतलब है कि बुधवार को हरियाणा सरकार ने खेमका सहित 14 आईएएस अधिकारियों का तबादला किया.

बताते चलें कि हरियाणा सरकार ने 1991 बैच के वरिष्ठ नौकरशाह अशोक खेमका को इस बार अभिलेख, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभागों का प्रधान सचिव बनाया है.
इससे पहले इसी साल मार्च में खेमका का ट्रांसफर करते हुए उन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया था.

गौरतलब है कि सीनियर आइएएस अधिकारी अशोक खेमका की गिनती बेहद ईमानदार अधिकारियों में होती है.वह गुरुग्राम में सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की जमीन सौदे से जुड़ी जांच के कारण सुर्खियों में रहे हैं. उनके बारे में कहा जाता है कि वह जिस विभाग में जाते हैं, वहीं घपले-घोटाले उजागर करते हैं, जिसके चलते अक्सर उन्हें ट्रांसफर का दंश झेलना पड़ता है. वह भूपिंदर सिंह हुड्डा के शासनकाल में भी कई घोटालों का खुलासा कर चुके हैं.

अशोक खेमका पश्चिम बंगाल के कोलकाता में पैदा हुए. फिर आईआईटी खड़गपुर से 1988 में बीटेक किया और बाद में कंप्यूटर साइंस में पीएचडी की. उन्होंने एमबीए की डिग्री भी ले रखी है. मालूम हो कि नवंबर 2014 में तत्‍कालीन हुड्डा सरकार ने रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के लैंड डील से जुड़े खुलासे के बाद खेमका का तबादला परिवहन विभाग में कर दिया था, जिसे लेकर काफी हंगामा मचा था और सरकार के इस फैसले पर सवाल उठे थे.

आपको बता दें कि खेमका ने हरियाणा के मुख्यमंत्री द्वारा उनके प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एसीआर) में नंबर कम करके नकारात्मक टिप्पणी करने को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. इससे पहले खेमका ने कैट में गुहार लगायी थी लेकिन कैट ने खेमका की याचिका खारिज कर दी थी. उसके बाद खेमका ने कैट के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस बार मामला उनकी 2016-17 की वार्षिक एसीआर से जुड़ा था.

TheLogicalNews

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