जलवायु परिवर्तन को लेकर दुनियाभर में प्रदर्शन, युवाओं ने जताई भविष्य की चिंता

राजधानी दिल्ली समेत एशिया और यूरोप के कई देशों में जलवायु परिवर्तन की चिंताओं को लेकर लाखों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे. शुक्रवार को एक वैश्विक आंदोलन के साथ जुड़कर लाखों लोगों ने ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभावों के ख़िलाफ़ दुनिया के अलग-अलग शहरों में मार्च निकाला.

इस मार्च में सबसे बड़ी तादादा में युवा और स्कूली बच्चे दिखे. मार्च और रैलियों में शामिल युवा तख्तियों को लेकर आम लोगों को जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक करते दिखे. इन तख्तियों में ‘One Planet One Fight’ और ‘Sea is Rising So must we’ जैसे स्लोगन देखे गए.

लाखों लोगों ने जलवायु परिवर्तन को लेकर कड़े कदम उठाने की मांग की.

ये सभी लोग संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन से कई दिन पहले वैश्विक नेताओं पर दबाव बनाने के लिए सड़कों पर उतरे थे.

लाखों की संख्या में सड़क पर उतरे लोग

जर्मनी- 500 शहरों में 6 लाख 30 हज़ार लोगों ने घरों से बाहर निकलकर प्रदर्शन किया.

हेमबर्ग- में 30 हज़ार तो म्यूनिच में 17 हज़ार युवा सड़कों पर निकले.

वहीं फ्रांस और पेरिस में लोगों ने ह्यूमन चेन यानी मानव श्रंखला बनाकर मार्च किया.

यूरोपिय शहर एम्सटर्डम में शांति मार्च निकाला गया और उन लोगों को श्रद्धाजंली अर्पित की गई जो जलवायु संकट के शिकार हुए.

अमरीका और कनाडा में भी लोगों घरों से बाहर निकले हालांकि उनकी संख्या काफी कम थी.

ऑस्ट्रेलिया- हाल ही में जंगलों की भयानक आग से गुज़र रहे ऑस्ट्रेलिया में सिडनी शहर में भारी संख्या में लोगों ने सरकारी दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन किया. हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन के ख़िलाफ़ विरोध मार्च और रैलियां निकाली.

दिल्ली- राजधानी दिल्ली में 50 से ज्यादा स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों ने पर्यावरण मंत्रालय तक मार्च निकाला. मार्च में युवाओं ने जमकर नारेबाज़ी की और जलवायु आपताकाल लगाने की मांग की.

बता दें कि भारत विश्व में ग्रीन हाउस गैस के सबसे बड़े स्त्रोत में से एक है. संयुक्त राष्ट्र के एक अध्ययन के मुताबिक दुनिया के सबसे प्रदूषित 15 शहरों में से 14 भारत में हैं.

सोमवार से स्पेन के मेड्रिड में वैश्विक स्तर का COP-25 शिखर सम्मेलन शुरू होना है. ये सम्मेलन 12 दिनों तक चलेगा. इसमें 200 देशों के नेता शामिल होंगे. ये सभी बैठक कर 2015 की पेरिस जलवायु संधि की नियमों को आखिरी रूप देंगे. ये संधि 2021 से वैश्विक स्तर पर लागू हो जाएगी.

इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि सदी के अंत तक वैश्विक तापमान 4 डिग्री सेल्सियस बढ़ने की आशंका है. अगर ऐसा होता है तो कुछ इलाके ख़त्म हो जाएंगे या कहे वीरान हो जाएंगे.

TheLogicalNews

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