अमेरिका और चीन के गतिरोध के बीच साठ साल में पहली बार व्हाइट हाउस पहुंचे तिब्बती नेता -प्रेस रिव्यू

अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापारिक गतिरोध के बीच तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख डॉक्टर लोबसांग सांगे ने व्हाइट हाउस का दौरा किया है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक शुक्रवार को डॉक्टर सांगे ने व्हाइट हाउस में तिब्बत मामलों के नवनियुक्त समन्वयक रॉबर्ट डेस्ट्रो से मुलाक़ात की. तिब्बत की निर्वासित सरकार के किसी नेता का यह बीते छह दशकों में पहली आधिकारिक अमेरिकी यात्रा है.

अख़बार का कहना है कि अमेरिका के इस कदम से चीन के साथ पहले से चल रहे तल्ख रिश्तों में और तनाव पैदा हो सकता है.

जानकारों का मुताबिक केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम है क्योंकि इससे सीटीए की प्रजातांत्रिक व्यवस्था और इसके राजनीतिक प्रमुख दोनों को मान्यता मिलती है.

केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) का मुख्यालय भारत स्थित हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में है.

सीटीए के प्रवक्ता ने कहा, “हमें खुशी है कि दो लोकतंत्र एक दूसरे को मान्यता दे रहे हैं. सीटीए और इसके नेता का व्हाइट हाउस में स्वागत एक अच्छी शुरुआत कही जा सकती है. उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में अमेरिकी अधिकारियों के साथ सीटीए की भागीदार का सकारात्मक चलन बढ़ेगा.”

पेरारिवलन

पेरारिवलन की रिहाई पर फ़ैसला तमिलनाडु के राज्यपाल को करना हैः सीबीआई

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में आजीवन कारावास काट रहे दोषी एजी पेरारिवलन की रिहाई पर फ़ैसला तमिलनाडु के राज्यपाल को करना है.

द हिंदू अख़बार के मुताबिक पेरारिवलन की माँ ने राज्यपाल से उनकी रिहाई की अपील की है. पेरारिवलन को 19 साल की उम्र में गिरफ़्तार किया गया था. इसी महीने के पहले हफ़्ते में सुप्रीम कोर्ट ने पेरारिवलन की सज़ा माफ़ी की अर्जी तमिलनाडु के राज्यपाल के पास दो वर्षों से लंबित रहने पर अपनी नाराज़गी जताई थी.जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि शीर्ष अदालत इस बात से खुश नहीं हैं कि सज़ा माफ़ी की सिफारिश दो वर्ष से लंबित है. कोर्ट ने कहा था कि अदालत चाहती है कि राज्यपाल आदेश पारित करें. साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि क्या सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर राज्यपाल को इस मामले में फ़ैसला लेने का आग्रह कर सकता है. उन्होंने तब पेरारिवलन के वकील से इस मामले में क़ानून के प्रावधानों के बारे में पूछा था.

पीठ ने तमिलनाडु के एडिशनल एडवोकेट जनरल बालाजी श्रीनिवास से पूछा था कि फ़ैसला लेने में आखिर राज्यपाल इतनी देर क्यों लगा रहे हैं. इस पर श्रीनिवासन ने कहा था कि यह मामला व्यापक साजिश का है और राज्यपाल सीबीआई की रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं.

इस मामले में शनिवार को सीबीआई ने 24 पेज़ का एक हलफ़नामा कोर्ट में दायर किया. इसमें उसने बताया कि पेरारिवलन की रिहाई का विषय राज्यपाल और याचिकाकर्ता के बीच एक मुद्दा था और इसमें सीबीआई की कोई भूमिका नहीं है.

इस दौरान एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया है कि पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के पीछे बड़ी साजिश की जांच जारी है.

पेरारिवलन उन सात दोषियों में से एक हैं जिन्हें आजीवन कारावास की सज़ा मिली थी. उनके साथ ही इस मामले में संथन, मुरुगन, नलिनी, रॉबर्ट पायस, जयकुमार और रविचंद्रन जेल में सज़ा काट रहे हैं.

2018 में राज्य सरकार ने एक प्रस्ताव पारित कर इस मामले के सातों दोषियों को उनकी सज़ा पूरी होने से पहले रिहा करने की राज्यपाल से सिफारिश की थी.

दिल्ली दंगाः गुलफिशा फातिमा को मिली जमानत

उत्तर पूर्वी दिल्ली में इस वर्ष फ़रवरी में हुए दंगे से जुड़े एक मामले में छात्र कार्यकर्ता गुलफिशा फातिमा को शनिवार को जमानत मिल गई है.

अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने फातिमा को तीस हज़ार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत देने का आदेश दिया है. हालांकि उन पर यूएपीए एक्ट के तहत भी मामला चल रहा है, इसलिए वे जेल में ही रहेंगी.

दिल्ली के जाफ़राबाद इलाके में हुए दंगे की घटना में गोली लगने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी. अदालत ने इस आधार पर उसे जमानत दे दी कि इस मामले में सह अभियुक्त जेएनयू की छात्राएं और पिंजरा तोड़ की सदस्य देवांगना कलिता और नताशा नरवाल को पहले ही जमानत दी जा चुकी है.

देवांगना कलिता को दिल्ली हाई कोर्ट से 01 सितंबर को जबकि नताशा नरवाल को ट्रायल कोर्ट से 17 सितंबर को जमानत मिली थी.

फातिमा के मामले में कोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस की तरफ से दलील दी गई थी कि फातिमा ने कथित तौर पर साजिश रची और वे (संशोधित) सीएए, एनआरसी और एनपीआर के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण प्रदर्शन की आड़ में दिसंबर, 2019 से लगातार स्थानीय लोगों को भड़का रही थीं.

फातिमा इस मामले में तीन जून से ही हिरासत में थीं. अख़बार के मुताबिक दिल्ली दंगे के मामले में क़रीब 750 केस दर्ज किए गए और लगभग 1,200 लोगों को हिरासत में लिया गया.

इस बार सामान्य से अधिक ठंड पड़ेगीः मौसम विभाग

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक यह साल बीते वर्ष की तुलना में अधिक ठंडा रहेगा. भारतीय मौसम विभाग के हवाले से अख़बार ने लिखा है कि प्रशांत महासागर में सक्रिय ला नीना धाराओं की वजह से समूचे विश्व में जाड़े के मौसम पर व्यापक असर पड़ेगा.

‘ला नीना’ के असर से भारत के पश्चिमोत्तर इलाके में सामान्य से अधिक ठंड पड़ती है. गौरतलब है कि ‘ला नीना’ प्रशांत महासागर की प्राकृतिक धारा है. जिनके असर से सर्दी के मौसम में तापमान में कमी आती है.

अख़बार ने मौसम विभाग के क्षेत्रीय पूर्वानुमान केंद्र के प्रमुख कुलदीप श्रीवास्तव के हवाले से बताया है कि “पूरे जाड़े के मौसम के दौरान न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य से 2-2.5 डिग्री कम रहने के आसार हैं.”

उनके मुताबिक, “10 दिसंबर के आसपास न्यूनतम तापमान 5 से 6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जो कि आम तौर पर 20 दिसंबर के बाद देखा जाता है. और दिन का तापमान भी दिसंबर के महीने में दिसंबर के शुरुआत में ही गिरने लगेगा.”

शुक्रवार को दिल्ली में बीते 14 सालों के दौरान नवंबर के महीने का सबसे कम न्यूनतम तापमान (7.5 डिग्री) रिकॉर्ड किया गया है. हालांकि शनिवार को इसमें थोड़ी वृद्धि हुई और न्यूनतम तापमान एक डिग्री अधिक यानी 8.5 डिग्री सेंल्सियस रहा. हालांकि शनिवार को अधिकतम तापमान 24.6 डिग्री रिकॉर्ड किया गया.

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source: bbc.com/hindi

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